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Iron Scrap Rate — लोहे के कबाड़ का भाव
Loha scrap rate today — ग्रेड, मंडी और भाव की पूरी समझ।
आज का ताज़ा भाव: स्क्रैप का भाव दिन में कई बार बदलता है, इसलिए हम यहाँ कोई
तय रेट नहीं लिखते — पुराना लिखा भाव नुक़सान करा सकता है। सुबह 9:30 से शाम 7 बजे तक हर घंटे का भाव
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लोहा (Iron / Steel) स्क्रैप का सबसे बड़ा हिस्सा है — मात्रा में सबसे ज़्यादा, और हर कबाड़ी के काम की नींव। प्रति किलो भाव तांबे-पीतल से कम है, पर रोज़ की बड़ी मात्रा की वजह से कुल कमाई में इसका हिस्सा सबसे बड़ा रहता है। थोक में लोहे का भाव अक्सर प्रति टन (MT) में भी बोला जाता है।
लोहे के स्क्रैप के मुख्य ग्रेड
| ग्रेड | पहचान | भाव पर असर |
|---|---|---|
| HMS 1 (Heavy Melting Scrap) | मोटा लोहा — लगभग 6 mm या उससे मोटे गर्डर, एंगल, प्लेट, सरिया | ऊँचा |
| HMS 2 | पतला लोहा, चादर, गैल्वनाइज़्ड माल | HMS 1 से कम |
| नई कतरन (Sheet cutting) | फैक्ट्री में नई चादर काटने से निकले साफ़ टुकड़े | अच्छा — साफ़ और बिना जंग |
| कास्ट आयरन (ढलाई) | मशीन की बॉडी, इंजन ब्लॉक, पुराने पाइप, मैनहोल जैसे भारी साँचे वाले हिस्से | अलग भाव — फाउंड्री में जाता है |
| बुरादा (Turnings / Borings) | मशीन पर लोहा छीलने से निकला बारीक माल | कम — तेल और जंग की वजह से |
| भंगार / मिक्स | घर-मोहल्ले का मिला-जुला लोहा | सबसे कम — छँटाई से सुधरता है |
लोहे का भाव किन बातों से बदलता है
- सरिया और स्टील की मांग — निर्माण का मौसम, सरकारी प्रोजेक्ट और बारिश का सीधा असर।
- इंगट, बिलेट और स्पंज आयरन का भाव — फर्नेस इन्हीं के हिसाब से स्क्रैप ख़रीदती हैं।
- आयातित स्क्रैप — विदेश से सस्ता स्क्रैप आया तो देसी भाव दबता है।
- जगह — मंडी और फर्नेस से दूरी, यानी भाड़ा।
लोहे की बड़ी मंडियाँ
मंडी गोबिंदगढ़ (पंजाब) उत्तर भारत में लोहे और स्टील का बड़ा केंद्र है, अलंग (गुजरात) जहाज़ तोड़ने का सबसे बड़ा यार्ड है, और रायपुर (छत्तीसगढ़) स्टील उद्योग का बड़ा केंद्र है। इनके अलावा दिल्ली, कानपुर, मुंबई और लुधियाना जैसे शहरों के भाव भी पूरे देश की दिशा तय करते हैं। सभी मंडियों का हाल National Rate पर देखिए।
पहचान और छँटाई
- चुंबक — लोहे और साधारण स्टील पर चुंबक चिपकता है।
- स्टेनलेस स्टील — इसके कई ग्रेड (जैसे 304) पर चुंबक कम या बिल्कुल नहीं चिपकता। इसे लोहे में मत मिलाइए, इसका भाव अलग और ज़्यादा होता है।
- कास्ट आयरन — भारी, खुरदरा और तोड़ने पर दानेदार; इसे अलग रखिए।
बेहतर दाम पाने के तरीके
- मोटा (HMS 1) और पतला (HMS 2) लोहा अलग रखिए।
- लोहे से लकड़ी, रबर, प्लास्टिक, कंक्रीट और दूसरी धातुएँ हटाइए।
- कास्ट आयरन, स्टेनलेस स्टील और बुरादा अलग बेचिए।
- ट्रक भर मात्रा बनाकर सीधे बड़े ख़रीदार को बेचिए — भाड़ा और बिचौलिया दोनों बचते हैं।
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❓ सवाल-जवाब
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1 किलो लोहे के स्क्रैप का भाव कितना है?+
लोहे का भाव रोज़ बदलता है और ग्रेड (HMS 1, HMS 2, कास्ट आयरन, मिक्स), शहर और मात्रा पर निर्भर करता है। आज का भाव Metal Next Bazar की WhatsApp Live Rate सेवा या National Rate पेज पर देखिए।
HMS 1 और HMS 2 में क्या फ़र्क़ है?+
HMS 1 मोटा लोहा है — लगभग 6 mm या उससे मोटे गर्डर, प्लेट और एंगल। HMS 2 पतला लोहा और चादर है। HMS 1 पिघलाने में बेहतर होता है, इसलिए उसका भाव ज़्यादा रहता है।
अलग-अलग शहरों में लोहे का भाव अलग क्यों होता है?+
मुख्य वजह भाड़ा और स्थानीय मांग है। मंडी गोबिंदगढ़ या रायपुर जैसे केंद्रों के पास फर्नेस ज़्यादा हैं, इसलिए वहाँ भाव अलग होता है। दूर के शहर में माल पहुँचाने का ख़र्च भाव से कटता है।
स्टेनलेस स्टील को लोहे के साथ बेच सकते हैं?+
नहीं, अलग बेचिए। स्टेनलेस स्टील का भाव साधारण लोहे से ज़्यादा होता है। उसके कई ग्रेड पर चुंबक कम चिपकता है, इसी से पहचान होती है।